अहमदाबाद यात्रा: रक्तदान का महाकुंभ और ‘पतंग होटल’ का अद्भुत अनुभव
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जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब साधारण-सी यात्रा भी असाधारण प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। हाल ही में मुझे भी ऐसा ही अनुभव हुआ। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने अहमदाबाद में एक भव्य राष्ट्रीय रक्तदान सम्मेलन और जागरूकता रैली का आयोजन किया, जिसमें भाग लेने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ।
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| राष्ट्रीय रक्तदान सम्मेलन |
इस आयोजन का उद्देश्य केवल रक्तदान की आवश्यकता पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि यह समाज के उन अनगिनत योद्धाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास भी था, जो अपने निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में जीवन अर्पित कर चुके हैं। देश के कोने-कोने से आए रक्तदाता और समाजसेवी इस आयोजन में सम्मिलित हुए। हर कोई अपनी-अपनी कहानी और अनुभव लेकर आया था। किसी ने पहली बार रक्तदान का साहस साझा किया तो किसी ने सैकड़ों बार रक्तदान कर समाज को प्रेरणा दी। मेरे लिए यह क्षण गर्व से भरने वाला था। यहाँ मुझे न केवल रक्तदान सेवा का संदेश देने का अवसर मिला बल्कि उन महान व्यक्तित्वों से भी मिलने का सौभाग्य मिला, जिनका जीवन समाज के लिए समर्पित है।
मुख्य अतिथि – डॉ. अब्देलमलेक सयाह
वे कई दशकों से रक्तदान को विश्वव्यापी जनांदोलन बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि रक्तदान केवल स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता नहीं, बल्कि यह मानवता का सबसे बड़ा कर्तव्य है। उनके नेतृत्व में IFBDO ने दुनिया के अनेक देशों में रक्तदान कार्यक्रमों का विस्तार किया और युवाओं को इस महान कार्य से जोड़ा।
अहमदाबाद में उनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। जब उन्होंने मंच से यह कहा कि “भारत जैसे विशाल देश में यदि हर स्वस्थ व्यक्ति वर्ष में केवल एक बार भी रक्तदान कर दे, तो किसी भी जीवन को रक्त की कमी से अपना जीवन नही गवांना पड़ेगा। उनकी उपस्थिति ने सभी रक्तदाताओं और समाजसेवियों में एक नई ऊर्जा, प्रेरणा और संकल्प का संचार किया।
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| रक्तदान जागरूकता रैली |
रक्तदान के साथी – सेवा और समर्पण का संगम
जीवन के सफर में कभी-कभी कुछ मुलाकातें और संगत ऐसी होती हैं, जो केवल साथ होने का अनुभव ही नहीं देतीं, बल्कि हमें जीने की एक नई दृष्टि भी प्रदान करती हैं। अहमदाबाद की इस यात्रा में मेरे साथ ऐसे ही चार साथी थे, जिनकी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को और भी अर्थपूर्ण बना दिया।
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| नरेश शर्मा (हिमाचल प्रदेश), महेंद्र भाई जोशी (अहमदाबाद रेड क्रॉस, डबल सेंचुरियन रक्तदाता), वैशाली बहन पांड्या ( सेंचुरियन डोनर) और डॉ. संजीव मेहता छीब्बर (यमुनानगर, शतकीय रक्तदाता) |
सबसे पहले, महेंद्र भाई जोशी का उल्लेख करना आवश्यक है। वे अहमदाबाद रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रमुख आयोजक और स्वयं डबल सेंचुरियन रक्तदाता हैं। उनकी जीवनयात्रा इस बात का प्रमाण है कि निरंतर सेवा ही किसी मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। उनके साथ समय बिताना अनुशासन और समर्पण का पाठ पढ़ने जैसा है।
दूसरी ओर, वैशाली बहन पांड्या, भारत की प्रेरक लाइव सेंचुरियन डोनर, जिन्होंने अपने कार्यों से यह दिखाया कि समाजसेवा केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि नारी भी सेवा के हर क्षेत्र में उतनी ही अग्रणी और प्रेरक है। उनकी ऊर्जा और आत्मविश्वास ने हमारी यात्रा को और भी जीवंत बना दिया।
हमारे साथ थे डॉ. संजीव मेहता छीब्बर, हरियाणा के यमुनानगर जिले के श्रेष्ठ समाजसेवी और शतकीय रक्तदाता। उनके व्यक्तित्व में गहराई और सरलता दोनों का अद्भुत संगम है। वे समाजसेवा को केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि एक जीवन शैली मानते हैं।
और अंत में, मैं स्वयं—नरेश शर्मा, शिमला (हिमाचल प्रदेश) से। इस यात्रा ने मुझे यह अनुभव कराया कि जब सेवा-ध्वजवाहक एक साथ मिलते हैं, तो वातावरण ही सीख और प्रेरणा का माध्यम बन जाता है। यह संगम त्याग, अनुशासन और राष्ट्रधर्म की सजीव कक्षा था, जहाँ हर क्षण एक नई सीख छोड़ रहा था।
पतंग होटल: घूमता हुआ नज़ारा, परंपरा और आधुनिकता का संगम
अहमदाबाद की यात्रा अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव था, लेकिन उस यात्रा का सबसे सुंदर और अनोखा पड़ाव था पतंग होटल (Neelkanth Patang – The Revolving Restaurant)। यह होटल शहर के हृदयस्थल में स्थित है और इसका नाम आते ही अहमदाबाद की पहचान स्वतः झलक उठती है।
हमारे साथियों—महेंद्र भाई और वैशाली बहन—ने पहले से ही लंच की अग्रिम बुकिंग कर दी थी। यह निर्णय हमारी यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया। जैसे ही हम होटल पहुँचे और वहाँ की ऊँचाई तथा वास्तुकला को देखा, मन गर्व से भर गया। लगभग 221 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह होटल अपने आप में अद्वितीय है। इसकी सबसे खास विशेषता है कि यह लगभग 90 मिनट में पूरा 360° घूमता है। यानी कि भोजन करते समय आप बैठे-बैठे पूरे अहमदाबाद शहर का विहंगम दृश्य देख सकते हैं।
इस होटल का डिज़ाइन मशहूर आर्किटेक्ट हसमुख पटेल ने तैयार किया था। इसकी प्रेरणा गुजरात की पारंपरिक “चबूतरा” शैली से ली गई है, जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों की झलक प्रस्तुत करती है। 1980 के दशक में इसका निर्माण हुआ और बाद में जब यह कुछ समय के लिए बंद रहा तो 24 अक्टूबर 2023 को इसे पुनः नवीनीकरण के बाद जनता के लिए खोला गया।
हम जैसे ही रेस्टोरेंट के अंदर बैठे, शीशों के पार का दृश्य धीरे-धीरे बदलता हुआ दिखने लगा। मानो शहर खुद अपनी कहानियाँ हमें सुना रहा हो। एक ओर साबरमती रिवरफ्रंट का शांत और आकर्षक दृश्य मन को मोह लेने वाला था, तो दूसरी ओर शहर की ऐतिहासिक इमारतें और व्यस्त सड़कें नई ऊर्जा का संचार कर रही थीं। ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था कि भोजन के साथ-साथ पूरा शहर भी अपनी अनोखी छटा में प्रस्तुत हो रहा हो।
इस होटल में लंच का अनुभव केवल खाने तक सीमित नहीं था। यह एक ऐसा क्षण था जिसमें संस्कृति, आधुनिकता और सौंदर्य सब एक साथ मिल गए थे। अहमदाबाद के इस अनोखे स्थल ने हमारी यात्रा को न केवल यादगार बनाया बल्कि यह भी सिखाया कि परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम जीवन को कितना सुंदर और प्रेरणादायी बना सकता है।
लंच अनुभव – स्वाद, संवाद और सेवा की ऊर्जा
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| नरेश शर्मा, शिमला हिमाचल प्रदेश |
अहमदाबाद की इस यात्रा का सबसे यादगार क्षण था पतंग होटल में लिया गया लंच। जैसे ही हम भीतर पहुँचे, वातावरण की सुसंयतता और आधुनिकता ने मन मोह लिया। चारों ओर सजी हुई टेबलें, पारदर्शी शीशों से दिखता बदलता हुआ दृश्य, और सौम्य वातावरण—सब कुछ इस अनुभव को खास बना रहा था।
मेज़ पर सुस्वादु शाकाहारी बुफे सजा था। भारतीय गुजरती व्यंजनों की सुगंध के साथ-साथ मैक्सिकन और चाइनीज़ पकवानों की विविधता मन को लुभाने वाली थी। प्लेटें बदलती रहीं, स्वाद जुड़ते रहे और इसी बीच बाहर का नज़ारा हर क्षण बदलता रहा। मानो शहर अपनी कहानियाँ धीरे-धीरे परोस रहा हो।
भोजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं रहा। बातचीत में जनसेवा के अनुभव, जागरूकता अभियान और भविष्य की योजनाएँ शामिल हो गईं। यह क्षण स्पष्ट कर रहा था कि जब सेवा का भाव साथ होता है तो भोजन केवल शरीर को ही नहीं, आत्मा को भी तृप्त करता है।
समय स्लॉट और बुकिंग – व्यवस्थित अनुभव
पतंग होटल का अनुभव सुव्यवस्थित है। प्रत्येक भोजन स्लॉट लगभग 1 घंटा 30 मिनट का होता है, जिससे सभी को आराम से दृश्य और भोजन का आनंद मिल सके।
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दोपहर का भोजन: 12:00–1:30 बजे, 2:00–3:30 बजे
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रात्रि का भोजन: 7:00–8:30 बजे, 9:00–10:30 बजे
लोकप्रियता को देखते हुए अग्रिम बुकिंग आवश्यक है। यह न केवल भीड़ और प्रतीक्षा से बचाती है, बल्कि यात्रा को सहज और आनंददायक बनाती है।
क्यों खास है पतंग होटल का अनुभव?
अहमदाबाद का पतंग होटल अपने आप में एक अनोखी धरोहर है। सबसे बड़ी विशेषता इसका 360° घूमता हुआ दृश्य है। यहाँ बैठकर जब भोजन किया जाता है तो पूरा शहर धीरे-धीरे घूमते हुए दिखाई देता है। यह अनुभव केवल आँखों के लिए आनंद नहीं, बल्कि मन के लिए भी रोमांचकारी है।
दूसरी विशेषता है इसका संस्कृति और आधुनिकता का संगम। होटल का डिज़ाइन गुजरात की पारंपरिक चबूतरा शैली से प्रेरित है, वहीं इसकी तकनीक पूरी तरह आधुनिक है। यह मेल हमें सिखाता है कि परंपरा और प्रगति का संतुलन जीवन को और भी सुंदर बनाता है।
तीसरी विशेषता इसका ऐतिहासिक महत्व है। 1980 के दशक में बना यह होटल अहमदाबाद की पहचान बन चुका है। वर्षों तक बंद रहने के बाद 2023 में इसका नवीनीकरण हुआ और अब यह शहर का गौरव है। यही कारण है कि पतंग होटल केवल एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि अहमदाबाद की संस्कृति और आधुनिकता का प्रतीक है।
होटल परिसर का संग्रहालय – स्मृतियों की रोशनी
पतंग होटल का आकर्षण केवल इसकी ऊँचाई और घूमने वाली बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिसर में स्थित संग्रहालय भी उतना ही मनमोहक है। यह संग्रहालय अतीत की उन स्मृतियों को संजोए हुए है, जो अहमदाबाद की सांस्कृतिक को जीवित रखती हैं। यहाँ प्रदर्शित वस्तुएँ केवल सजावटी नहीं, बल्कि इतिहास के जीवंत साक्षी हैं। पुराने औज़ार, हस्तकला की झलकियाँ, चित्र और दुर्लभ कलाकृतियाँ।
यही कारण है कि पतंग होटल का यह संग्रहालय केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण नहीं है, बल्कि यह अहमदाबाद की स्मृतियों को जीवित रखने वाला एक प्रकाशस्तंभ है। यह अनुभव हमें सिखाता है कि आधुनिकता के बीच भी इतिहास की रोशनी को संजोकर रखना हमारी ज़िम्मेदारी है।
विशेष धन्यवाद
अहमदाबाद की इस यात्रा को यादगार बनाने में जिनका सबसे बड़ा योगदान रहा, वे हैं हमारे प्रिय साथी महेंद्र भाई जोशी और वैशाली बहन पांड्या। उनका सहयोग केवल आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने हमें जिस आत्मीयता और स्नेह से मार्गदर्शन दिया, वह अविस्मरणीय है।
अहमदाबाद पहुँचने के क्षण से लेकर यात्रा के अंत तक हर पल उन्होंने हमारे लिए नई-नई जगहों का परिचय कराया। चाहे वह ऐतिहासिक स्थल हों, सांस्कृतिक धरोहरें हों या आधुनिक अहमदाबाद की पहचान—उन्होंने सब कुछ बेहद अपनत्व के साथ हमें दिखाया। यह केवल एक घुमक्कड़ी नहीं थी, बल्कि अपनेपन का वह एहसास था, जहाँ हर कदम पर स्नेह और सम्मान महसूस हुआ।
महेंद्र भाई का सरल और अनुशासित स्वभाव तथा वैशाली बहन का ऊर्जा से भरा मार्गदर्शन इस यात्रा की सबसे बड़ी पूँजी साबित हुआ। हम हृदय से आभारी हैं कि अहमदाबाद में हमें इतना स्नेह, सम्मान और अपनापन मिला। यह अनुभव सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा और आगे भी सेवा-पथ पर हमें प्रेरित करता रहेगा।
निष्कर्ष
अहमदाबाद की यह यात्रा केवल भ्रमण भर नहीं थी, बल्कि सेवा, संस्कृति और संकल्प का संगम थी। रेड क्रॉस के सम्मेलन और रैली ने रक्तदान को जीवन का सर्वोच्च मूल्य स्थापित किया। वहीं पतंग होटल का अनुभव यह सिखा गया कि आधुनिकता और परंपरा जब एक साथ आती हैं, तो जीवन और भी सुंदर हो उठता है।
यह यात्रा हमें यह भी बताती है कि जब समाजसेवी, रक्तदाता और विरासत एक मंच पर मिलते हैं, तो यात्रा केवल स्मृति नहीं रह जाती, बल्कि वह जीवन की प्रेरणा बन जाती है।
👉 अगले अंक में आप पढ़ेंगे—अहमदाबाद की प्रसिद्ध नगरदेवी की कहानी, पारंपरिक बाज़ारों की सैर, विश्व प्रसिद्ध फ्लावर शो की छटा और रानी की बाव की अद्भुत गाथा।
© 2025 Blood Donor Naresh Sharma – Sankalp Seva |एक संकल्प, एक प्रकाश, अनंत जीवन।










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